Archive of posts with category 'punitachariji'

अंतर के तेज की खोज में - सत्य घटना

पारसनाथ (परमपूज्य श्री पुनिताचारीजी महाराज) को थलतेज(अमदावाद) अन्तर के तेज की खोज के लिए अनुकूल लगा (यह बात बहोत साल पहले की हे जब अमदावाद का आज का थलतेज शहर...

निर्मल मन हरी को भाता हे

गीता रामायण वेद शास्त्र , यदि कुछ भी न तुजको आता हे | हरी गुरु चरण में मन को लगा , निर्मल मन हरी को भाता हे || चलते फिरते...

अंत समय क्या जाएगा संग में सोच विचार

बहार रंग रंगाय के महल सजाया यार दिप जलाया सब तरफ तो भी लगे अंधियार | जन्म जन्म का कर्म ही अन्धकार समछाय, दिप जले अंदर नहीं होवे ना उजियार...