Bhajans

निर्मल मन हरी को भाता हे

गीता रामायण वेद शास्त्र , यदि कुछ भी न तुजको आता हे | हरी गुरु चरण में मन को लगा , निर्मल मन हरी को भाता हे || चलते फिरते...

अंत समय क्या जाएगा संग में सोच विचार

बहार रंग रंगाय के महल सजाया यार दिप जलाया सब तरफ तो भी लगे अंधियार | जन्म जन्म का कर्म ही अन्धकार समछाय, दिप जले अंदर नहीं होवे ना उजियार...